मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे से सियासी गलियारों में हलचल, मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिल्ली दौरे को देखते हुए राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें शुरू हो गईं। मुख्यमंत्री तीन दिनी दौरे पर सोमवार को दिल्ली पहुंचे। मंगलवार को उन्होंने भाजपा मुख्यालय में पार्टी के कई नेताओं से भेंट की।
मुख्यमंत्री धामी को बुधवार को जल शक्ति मंत्रालय में किसाऊ बांध परियोजना के संबंध में एक बैठक में हिस्सा लेना है। मंगलवार को उन्होंने पार्टी मुख्यालय में भाजपा राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी व राज्यसभा सदस्य अनिल बलूनी समेत कई नेताओं से भेंट की।
मंत्रिमंडल में अभी तीन स्थान रिक्त:
यद्यपि, राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष के दिल्ली से बाहर होने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। मुख्यमंत्री के तीन दिन दिल्ली में होने से माना जा रहा है कि वह उत्तराखंड में विभिन्न विभागों में नियुक्तियों को लेकर चल रहे विवाद समेत ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से केंद्रीय नेतृत्व को अवगत कराएंगे।
इस बीच मंगलवार को इंटरनेट मीडिया में कयास लगने लगे कि मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर भी केंद्रीय नेतृत्व से चर्चा कर सकते हैं। मंत्रिमंडल में अभी तीन स्थान रिक्त हैं। इसके अलावा छह महीने के कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के प्रदर्शन के आकलन और नियुक्ति विवाद को लेकर दो-तीन मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही है।
यद्यपि स्वयं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार या फेरबदल की संभावना से इन्कार कर चुके हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा था कि अभी संगठन के विस्तार की कवायद चल रही है और फिलहाल पार्टी का पूरा ध्यान इसी ओर है।
उधर, ये भी माना जा रहा है कि धामी सरकार 23 सितंबर को छह माह का कार्यकाल पूरा करने जा रही है। इस उपलक्ष्य में भाजपा नेताओं को विभिन्न निगमों, प्राधिकरणों व आयोगों में अध्यक्ष उपाध्यक्ष के पदों पर दायित्व की सौगात मुख्यमंत्री दे सकते हैं। इस बारे में भी वह पार्टी के केंद्रीय नेताओं से विमर्श कर सकते हैं।

किसाऊ बांध पर आज उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेंगे धामी:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार को दिल्ली में जलशक्ति मंत्रालय में होने वाली बैठक में भाग लेंगे। यह उच्च स्तरीय बैठक किसाऊ बांध पर चर्चा को बुलाई गई है। मुख्यमंत्री धामी इसमें प्रदेश की लंबित 10 अन्य जलविद्युत परियोजनाओं को शुरू करने का मुद्दा भी उठा सकते हैं।
उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी सम्मिलित होंगे। उत्तराखंड और हिमाचल की सीमा पर टौंस नदी पर दोनों प्रदेश संयुक्त रूप से परियोजना का निर्माण करेंगे। इस बांध के बनने से इन दोनों राज्यों के अतिरिक्त दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को जलापूर्ति की जाएगी।

1379 एमयू बिजली का होगा उत्पादन:
660 मेगावाट की किसाऊ जलविद्युत परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया है। इसके लिए केंद्र से 90 प्रतिशत सहायता मिलेगी। करीब 12हजार करोड़ की लागत वाली इस परियोजना के डाउन स्ट्रीम की परियोजनाओं में भी विद्युत उत्पादन बढ़ने की संभावना है।
बांध से 1379 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होगा। समझौते के अंतर्गत जल भंडारण का 93 प्रतिशत भाग हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली को मिलेगा। तीन-तीन प्रतिशत भाग उत्तराखंड और हिमाचल को मिलेगा।

17 गांवों के छह हजार निवासी होंगे विस्थापित:
किसाऊ परियोजना में बांध निर्माण से दोनों राज्यों की 2950 हेक्टेयर भूमि प्रभावित होगी। 17 गांवों के छह हजार से अधिक निवासी विस्थापित होंगे।
उच्च पदस्था सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री बैठक के दौरान उन 10 परियोजनाओं को शुरू करने की मांग कर सकते हैं, जिन पर कोई विवाद नहीं है। विशेषज्ञ समिति और जलशक्ति मंत्रालय इन परियोजनाओं को पहले ही सैद्धांतिक स्वीकृति दे चुके हैं। उत्तराखंड ने सुप्रीम कोर्ट में भी विशेषज्ञ समिति की संस्तुतियों के आधार पर शपथ पत्र दाखिल किया हुआ है।

ये हैं 10 परियोजनाएं:
धौलीगंगा पर लाता तपोवन, भ्यूंदार गंगा पर भ्यूंदार गंग, खैरोगंग, अलकनंदा, कोटलीभेल वन-एक और वन-बी, धौलीगंगा पर तमकलता, झालकोटी, उर्गम-टू और जेलम तमाक।

 

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