स्टांप चोरी समेत कई खामियां मिलने पर विकासनगर उप निबंधक अपूर्वा सिंह पर गिरी गाज, भेजा निलंबन की संस्तुति

जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा औचक निरीक्षण में बड़ी अनियमितताएं मिलने पर उप निबंधक विकासनगर पर गाज गिरी है.

देहरादून: जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा उप निबंधक कार्यालय विकासनगर में किए गए औचक निरीक्षण स्टांप चोरी और गंभीर अनियमितताओं का बड़ा खुलासा हुआ है. निरीक्षण के दौरान उप रजिस्ट्रार कार्यालय विकासनगर में चल रहे स्टांप चोरी एवं अवैधानिक रजिस्ट्रियों के मामले सामने आए हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने विकासनगर उप निबंधक अपूर्वा सिंह के निलंबन और अन्य विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेज दी है.

बता दें कि जिलाधिकारी ने 4 मई को उप निबंधक कार्यालय विकासनगर में औचक निरीक्षण किया गया था.निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने पर कार्यालय से महत्वपूर्ण अभिलेख जब्त किए गए थे. निरीक्षण के दौरान साल 2018, 2024 और 2025 तक के मूल विलेख पत्र कार्यालय में संदिग्ध स्थिति में पाए गए. कई पंजीकृत दस्तावेज महीनों और सालों तक कार्यालय में रोके जाने के तथ्य भी सामने आए हैं. जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित अभिलेख तत्काल जब्त कर जांच प्रारंभ कर दी है. कार्यालय में 25 रजिस्ट्रियां सालों से बगैर किसी कारण अभिलिखित और सूचना के डंप पाई गई थी, जिसका कारण जानने पर संतोषजनक के उत्तर नही मिला. निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने हाईकोर्ट के आदेश द्वारा बाधित गोल्डन फॉरेस्ट के खातों में 150 अवैध गैरकानूनी रजिस्ट्री पकड़ी हैं.

मुख्यमंत्री के निर्देशन में जिला प्रशासन देहरादून द्वारा राजस्व और भूमि संबंधी मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, भ्रष्टाचार अथवा अनियमितता के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है. जिला प्रशासन की सरकार और शासन की मंशा के अनुरूप पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी प्रशासन करना सर्वाेच्च प्राथमिकता है और भविष्य में भी इस प्रकार लगातार एक्शन देखने को मिल सकते हैं.
-सविन बंसल,जिलाधिकारी-

प्रारंभिक जांच में विक्रय के लिए प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्रियां किए जाने के मामले भी सामने आए हैं, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है. जांच के दौरान गोल्डन फॉरेस्ट की प्रतिबंधित भूमि की सैकड़ों रजिस्ट्रियां किए जाने की जानकारी भी प्राप्त हुई है. जिसमें तत्कालीन कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका भी की भी जांच की जा रही है. जिला प्रशासन के अनुसार इस प्रकार की अवैधानिक रजिस्ट्रियों से न केवल राजस्व की क्षति हुई बल्कि भूमि क्रेताओं के साथ धोखाधड़ी जैसी स्थिति भी उत्पन्न हुई है. निरीक्षण एवं प्रारंभिक जांच में धारा 47-ए के अंतर्गत स्टांप शुल्क चोरी से संबंधित 47 प्रकरण चिन्हित किए गए हैं. जिला प्रशासन के अनुसार यह करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है.

मामलों में नियम अनुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी. साथ ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. निरीक्षण के दौरान कार्यालय संचालन में पारदर्शिता की कमी, अभिलेखों के रखरखाव में लापरवाही, प्रक्रियात्मक नियमों के उल्लंघन और रिकॉर्ड प्रबंधन में गंभीर खामियां भी सामने आई हैं. जिलाधिकारी ने इन सभी बिंदुओं पर विस्तृत जांच कर समग्र रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं. जिला प्रशासन द्वारा वर्तमान के साथ-साथ पूर्व में तैनात सभी सब-रजिस्ट्रारों के कार्यकाल के दौरान हुई संदिग्ध गतिविधियों की भी की जा रही हैं. प्रकरण से संबंधित विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित की जा रही है, ताकि दोषियों के खिलाफ आवश्यक विभागीय और विधिक कार्रवाई की जा सके.